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Sunday, August 23, 2020

प्रेम | Prem

10:29 PM 1
 प्रेम | Premप्राणप्रिये तुम हो दीपक तम को हरने तुम आयी हो,इस काल ग्रसित व्यथित मन मे उजियारा करने आयी हो।तुम राधा सी निश्छल काया मुझमे कृष्ण सा प्रेम भरा,इस गीत रहित, निर्जीव अधर को मुरलीधर करने आयी हो।तुम चिर वर्षा मैं चातक पर मेघों का आभाव यहाँ,इक आशा, इस दुर्गम मरुथल पर बदरी बन कर छायी हो।तुम...

प्रेम अब निश्चित नही है | Prem Ab Nischit nahi hai

 प्रेम अब निश्चित नही है | Prem Ab Nischit nahi haiप्रिये निश्चिन्त हो कर जग बसाओकिंचित ना बूझो ये कहानीअंतिम विनय है भूल जाओप्रेम अब निश्चित नही है।पाषाण हृदय रोता नही हैक्यों खड़ी संशय में होना संकोच खाओ, भूल जाओप्रेम अब निश्चित नही है।पत्र जो तुमने लिखे थेकर दिये अग्नि समर्पितहोम उनका हो गया,...

पथिक तुम्हे अब बढ़ना होगा | Pathik Tumhe Ab Badhna Hoga

पथिक तुम्हे अब बढ़ना होगा | Pathik Tumhe Ab Badhna Hoga डगर कठिन हो कठिन चुनौती  ही चाहे गिर गिर जाये साहस रख कर चलना होगा पथिक तुम्हे अब बढ़ना होगा। शूल चुभें हो इति भाल से हानि घात चाहे शीश पे आये हिम्मत रख कर लड़ना होगा पथिक तुम्हे अब बढ़ना होगा। घोर प्रलय हो दिनकर छिप...

नन्हा बच्चा | Nanha Bachcha

नन्हा बच्चा | Nanha Bachcha आज भी मेरे अन्तर्मन में, एक छोटा बच्चा रहता है, वो खिलखिलाक़े हँसता है, और सूरज से आंख लड़ाता है, वो हवा से रेस लगाता है, कभी लहरों सा बलखाता है, वो आसमान में उड़ता है, कभी भाई बहन से लड़ता है, आइसक्रीम के लिए मन अब भी ललचाता है, माँ की एक आवाज़...

कोख | Kokh

कोख | Kokh देखो न माँ आज खुशियों ने कुंडी सी खटकाई है, तुझसे मिलने दूर देश से नन्ही परी एक आई है, मैंने सोचा मुझसे मिलकर तुम बहुत अधिक हर्षाओगी, मुझको अपनी गोद मे पाकर फूली नही समाओगी। मैंने सोचा तुमसे मिलकर मैं तुमको थोड़ा सा सताऊंगी, और कभी फिर तुमसे छिपकर दूध मलाई खाऊँगी, जब मुझको डाटोगी...

आखिर क्यों | Akhir Kyon

  आखिर क्यों | Akhir Kyon आखिर क्यों मैं इतना निर्लज्ज हुआ, जो उनका प्यार भुला बैठा, जिनकी उंगलियां पकड़ कर चलना सीखा, लाठी मैं उनको थमा बैठा। वो कल की ही तो बातें थी, जब तुम मुझे खिलाकर खाते थे, ज़िम्मेदारियों का बहाना देकर , तुम्हारा अथाह स्नेह भुला बैठा। वो कल की ही तो...

Saturday, July 27, 2019

शायर लिख सकता है चिंगारी | Shayar Likh Sakta Hai Chingari

शायर लिख सकता है चिंगारी | Shayar Likh Sakta Hai Chingari गरीब बच्चे सिग्नल पर, वो रेलवे स्टेशन और क्या बस-अड्डे,हमेशा मांगते फिरते, दुधमुहे, तुतलाते, अड़ियल, कुछ जिद्दी से,तुम फेंकते चिल्लर, वो एक रुपया वो दो रुपिया, वो हर्ष और दान का सुख,कभी रुक-कर सोंचा है उनका भी, किसके तनय हैं वो?कहीं दूर...

@Viv Amazing Life

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